● मेष-राशि -

.... पराक्रम और अग्रणी रहने का स्वाभिमान रखने वाले मेष राशि के जातक बदलते समय के तीव्रगामी जीवन में अक्सर अधिक बोल जाते है और विवादों में फंस जाते है । इन्हें तनाव से बचना चाहिये क्योंकि तनाव में ये लोग ज्यादा खा लेते हैं और अपना वजन बढ़ा लेते हैं । 
मसालेदार हरी सब्जियाँ, भूना हुआ खाना, भूने आलू जैसे पित बढ़ाने वाले खाने ये खूब खाते हैं । मांस-मछली खाने वाले मेष-राशि के जातक तो पित से परेशान रहते ही हैं । अगर ये शराबखोरी करने वाले होतो फिर छककर शराब पीना इनकी आदत हो जाती है । 
किसी की पर्वाह ये नहीं करते हैं । जो मन में आया वही करते हैं । प्रचलित रीती-रिवाजो से हटकर चलते हैं और कोशिश करते हैं कि - अपने ढंग से मोह-माया से छुटकारा मिल जाये और मोक्ष की राह दिख जाये । 
दरसअल ये लोग धर्म के तेजस को भी बनाये रखना चाहते हैं । मोक्ष की राह पर भी चलना चाहते हैं । कर्मयोग को भी साधना चाहते हैं और भौतिक-सुख भी चाहते हैं । जब जिसका मौका मिलता है - ये करने का प्रयास करते हैं । फिर - अंत में कुंडली के ग्रहयोग इनके जीवन की राह तय कर देते हैं ।

● वृषभ-राशि
.... रचनात्मकता इस राशि की विशेषता है और यह अपने क्षेत्र में इसकी व्यवस्था करती है । वैसे - सृजनात्मकता इस राशि का गहरा अर्थ है । अगर इसके शाब्दिक अर्थ की बात करें तो अर्थ है - हट्टा-कट्टा आदमी, नैतिकता, कामदेव, मंदिर का विशेष आकार, चँद्रमा का एक घोड़ा और स्कंद का एक अनुचर । इन सबमे जो गुण-धर्म है - वही गुण-धर्म इस राशि में भी है । जैसे इस राशि के चित्र में जो सांड दर्शाया गया है । इस सांड में जो प्रजनन की गोपनीय शक्ति होती है वैसी ही कई गुप्त शक्तियां वृषभ राशि वालों में होती है । समय आने पर ये लोग इसे प्रकट भी करते है ।
बहरहाल गुप्त शक्तियों के मालिक वृषभ राशि वालों के लिये खाना बड़ा प्रिय होता है । ये दिन में कई बार खाना खा सकते हैं । अगर ग्रहयोग सशक्त ना हो तो ये मोटे-ताजे और थुल-थुल शरीर वाले हो जाते हैं । 
वृषभ-राशि वाले रोमांटिक प्रेमी भी होते हैं । अपने प्रेमी को भी ये खाना खिलाना पसंद करते और उसे खाने पर बुलाते हैं ।
घी, मक्खन से लबालब और रईसों जैसा खाना ये पसंद करते हैं । हालांकि अपने घर-परिवार के पारंपरिक खाने से इनका खूब लगाव होता है । शराब की लत इनका स्वभाव चिड़चिड़ा बना सकती है, इन्हें आजकल के हिसाब से सलाद अवश्य लेना चाहिये ।
इनमे प्रत्यक्ष आकर्षण ना भी दिखाई दे, तो भी ये अपनी गुप्त आकर्षण शक्तियों से दूसरों को अपनी और आकर्षित कर ही लेते हैं । 
इनमे और भी कई गुप्त शक्तियां होती है जो समय आने पर अपनेआप ही इनके द्वारा इस्तेमाल हो जाती है । ये राशि आधुनिक राशि है और अपने जातकों को आधुनिकता के रंग में रंगती हुई चलती है । इस राशि की महिला जातक विशेष सुन्दर होती है ।

● मिथुन-राशि
....शास्त्रों में बताया गया है कि - ब्रह्मा ने स्वयं को स्वयंभू और शतरूपा के रूप में विभक्त कर मिथुन-राशि का निर्माण किया है ताकि सृष्टि का सृजन हो सके । 
द्वन्द और अस्थिरता इस राशि का प्रमुख लक्षण है । संतोष, तुष्टि, धैर्य और स्थिरता मिथुन राशि के जातकों में नहीं होते हैं । ये लोग सदा ही कुछ पाना चाहते हैं, चाहे उसे पाना इनके बस में अथवा ना हो । निरंतर प्रयासशील रहना और द्वन्द में रहना इनका स्वभाव होता है । बुद्धी और वाकशक्ति इस राशि का प्रबल गुण है ।
मृग-मरीचिका की तृष्णा में सदा चंचल और अस्थिर बने रहने वाले मिथुन-राशि वाले नृत्य, गायन, विहार और संचार के क्षेत्र से अवश्य जुड़ते हैं । कभी-कभी जब शनि, कुंडली में बलवान हो तो मिथुन-राशि के जातकों की त्वचा, बाल और वाणी रूखी हो जाती है । लेकिन इनमे पुरुषार्थ फिर भी बहुत होता है ।
ये लोग कलाकार विचारधारा के होते हैं और ये बात इनके खाने में भी देखने को मिलती है । इनके खाने में अधिकता के बजाय विविधता दिखाई देती है । लेकिन जल्दबाज़ी में खाना खाते है । घर के बजाय बहार का खाना ज्यादा पसंद करते है और मसालेदार खाना पसंद करते हैं । 
ज्ञान-विज्ञान से ओतप्रोत ये राशि अपने जातक को उन्नति की प्रथम सीढ़ी से चलाकर शीर्ष तक पंहुचा देती है । कुंडली के ग्रहयोग उल्लेखनीय होंगे ।

★ कर्क-राशि

• जीवन की मुख्य धारा से हटकर कुछ नया करने का प्रयास करते हैं, कर्क राशि वाले । लेकिन फिर अंतर्मुखी होकर पुनः उसी धारा में लौट आते हैं जहाँ से चले थे । इनका मन कर्कट की तरह होता है, जो इस राशि का चिन्ह है और जो पानी के अंदर भी रहता है और पानी के बाहर भी । बहरहाल, दोनों ही अवस्थाओं में ये खुद पर नियंत्रण बनाये रखते हैं ।
कर्क राशि के लोग उन्नति के लिये स्वयं को परिस्तिथियों के हवाले कर देतें है और समय के अनुसार ढलने का प्रयास करते हैं । 
दरअसल ये लोग उन्नति के वाहन की तरह होते हैं । जो खुद तो उन्नति करते ही है साथ-साथ दूसरों को भी उन्नति की प्रेरणा देते हैं ।
देवस्त्री जैसे धार्मिक स्थान, खेत-खलिहान, बाग़-बग़ीचे और जल-प्रपात जैसी जगहों पर प्रसन्नता पाने वाले कर्क राशि वालों का खानपान व्यवस्थित नहीं होता है । जलराशि से प्रभावित कर्क राशि के जातक शराब के आदि हो सकते हैं । जोकि इनके स्वास्थ को खराब करने का काम करती है । गरिष्ठ भोजन, भुना हुआ और मसालेदार खाना इनके पेट की जलन का कारण बन जाते हैं । रेशेदार फल और फल्लियों वाली सब्जियां इनके स्वास्थ को बेहतर बना सकती हैं । 
बहरहाल, कर्क-राशि के जातक स्वनिर्मित और रचनात्मक कार्य करने वाले होते हैं । निरंतर उन्नति की और अग्रसर रहना इन्हें प्रसन्न रखता है ।

★ सिंह-राशि

• सदा बे-चैन परंतु जीवन-शक्ति से भरपूर सिंह राशि के जातक जीवन की नई दिशाओं को ढूंढने के लिये उत्सुक रहते हैं और जो सामने है उसमे से नविन अर्थ तलाशने में लगे रहते हैं ।
ये लोग प्राचीन सभ्यताओं और परम्परागत मूल्यों के हिमायती होते हैं । कोई कितना भी निपुण क्यों ना हो ये लोग उसे अपने सामने हीन ही समझते हैं । इसका कारण यही है कि - इनमे हलाकि प्रकृति की प्रत्येक बात समझने की योग्यता होती है परन्तु जड़ राशि होने से ये अंतर्मन की बात को प्रकट नहीं कर पाते हैं । इस तरह ये लोग समझते हैं कि - जो ये जानते हैं वो कोई और नहीं जानता है ।
बहुसंख्यक होने की लालसा और विस्तार करने की इच्छा से भरे सिंह राशि के जातकों का जीवन दिल के बादशाहों जैसा होता है । 
ये कई लोगों के साथ बैठकर खाना, खाना पसंद करते हैं । ये लोग मांसाहार और शराब के शौक़ीन हो सकते है । लेकिन फल और सब्जियों का सेवन इन्हें आधुनिक जीवन शैली से तालमेल बनाने में सहयोग करेगा । बहरहाल सिंह की तरह रहना और गर्जन से बोलना इनके जीवन का अंदाज़ है । उष्ण प्रकृति और गर्जनशील प्रवृति के कारण सिंह-राशि के जातक अपयश के भागी भी बनते है । लेकिन उसकी ये परवाह नहीं करते हैं । क्रांतिकारी, अविष्कारक, विचारक और वैभव से परिपूर्ण सिंह राशि के जातक महामानव कहलाते हैं ।

★ कन्या-राशि

"• एक क्रियात्मकता के भंडारण की राशि, कन्या-राशि सृष्टि की क्रियात्मक शक्ति को अपने द्वारा प्रकट करती है । लेकिन इसके बाद भी ये असंतोष से भरी रहती है । दरअसल ये निराश लोगों की राशि है कि - हर तरह के सुख भोग लेने के बाद भी इस राशि के लोग संतोषी नहीं बन पाते है । सुख-संपति और भोग-विलास में लिपटे रहने पर भी इन लोगों को शान्ति नहीं मिलती है । वैसे, इसके और भी बहुत से रहस्य है जो अभी प्रकट नहीं हुये हैं । इस राशि में जन्मे लोग अपने उत्तरदायित्व को भरपूर ढंग से पूर्ण करने का प्रयास करते हैं परंतु फिर भी दुखद जीवन जीने को बाध्य होते हैं ।
बहरहाल दुखनभंजनकर्ता कन्या-राशि के लोग आपातकाल में बहुत अच्छे सहयोगी सिद्ध होते हैं । खानपान का इनका अपना मापदण्ड होता है । ये अपनी पसंद का खाना, खाना पसंद करते हैं । ये लोग अपनी हेल्थ को लेकर सजग रहते हैं और वो खाते हैं जो इनके लिये स्वास्थ वर्धक हो ।
ये शीत प्रकृति की राशि है । इसके जातक हरे-भरे स्थानों पर घूमना, चित्र-शालाओं में समय बिताना और रति स्थानों पर आनंद लेना पसंद करते हैं । इनके अंदर गुप्त शक्तियां होती है इसलिये कभी-कभी इन्हें समझना आसान नहीं होता । इनके बोलने में और इनके व्यवहार में अंतर दिखता है । हालांकि युद्ध हो याँ शान्ति - ये लोग दोनों ही समय से तालमेल बना लेते हैं । 

 

★ तुला-राशि

•• आध्यात्मिकता और भौतिक रस से बनी तुला-राशि अपने जातकों को इनके संतुलन में ही जीवन गुजारने को मज़बूर कर देती है । दो विरोधात्मक शक्तियों के बीच संतुलन बनाना सहज और आसान नहीं होता । तुला-राशि के जातकों को अपने जीवन में यही परीक्षा देनी होती है । 
इसी के चलते इनके मन में असंतुलन का एक ज्वाला मुखी सा जलता रहता है परंतु ऊपरी तौर पर ये शांतचित बने रहते हैं । ये लोग अपने ज्ञान और असंतुलन के अहसास को दूसरों पर क्रियान्वित होता देखना चाहते हैं परंतु असंतुलन तो आखिर असंतुलन ही है जो अंतिम रूप में बना ही रहता है ।
बहरहाल, निरंतर उन्नति चाहने वाले तुला-राशि के जातकों का खानपान इनके लिये इतना अहम् नहीं होता जितना कि - ये इस बात के लिये लालायित रहते हैं कि - खाने का माहौल सुकून वाला हो । शराब इन्हें बिलकुल नहीं पीनी चाहिये । लहसुन खाना इनके लिये बहुत अच्छा होगा । इससे ये धमनियों से होने वाली बीमारियों से बच सकेंगे । 
हाट, बाज़ार और सौदेबाज़ी के स्थान इनके प्रिय स्थान है । वणिक और व्यापारिक स्वभाव इस राशि की प्रकृति है और इसके जातक भी ऐसे ही हैं । प्रत्येक बात में लाभ-हानि सोचना इसके जातकों का स्वभाव होता है । ये राशि शुद्र वर्ण की है और इसे किसी भी काम से परहेज नहीं है । काम कितना भी छोटा हो तुला राशि के जातक कर लेते हैं । राजनितिक चातुर्य और विचारशीलता इसके जातकों की विचारधारा होती है और यही इनकी उन्नति का कारण भी होता है ।

★ वृश्चिक-राशि

•• स्वार्थ और असंतोष से ओतप्रोत वृश्चिक-राशि अतंत रूप में सृष्टि के ज्ञान को प्राप्त कर लेती है और मोक्ष को प्राप्त होती है । अतिगूढ़ रहस्यों से भरी ये राशि जीवन के दूसरे भाग में सृष्टि के रहस्यों को प्रकट करती है । इससे पहले, अर्थात जीवन के दूसरे भाग के आरम्भ से पहले अगर वृश्चिक-राशि के जातक चेत जायें और अपने स्वार्थ, असंतोष और भौतिक सुखों की चाहत पर नियंत्रण रख सकें तो अपने स्वास्थ को बचाने में सफल हो सकते हैं । अन्यथा जीवन के दूसरे भाग में ये लोग खराब स्वास्थ से जूझते रहते हैं । बहरहाल, गरमा-गरम और मसालेदार खाने के शौक़ीन वृश्चिक-राशि वालों को अगर कोई मीठी चीज भी गरमागरम मिले तो ये बहुत प्रसन्न होते हैं । इसी वजह से वृश्चिक-राशि के जातक पित की समस्या से पीड़ित रहते हैं । इन्हें अपने पेट का ध्यान रखना चाहिये और जहाँ तक हो सके - स्वयं को पथरी, आमाशय और आंतरिक टूटफूट से बचाना चाहिये । अन्यथा पेट के अल्सर से बचना इनके लिये मुश्किल हो जाता है । 
वैसे - ये लोग किसी इंजिनीयर की तरह कार्य करते हुये कई तरह से आधुनिक बदलाव लाते हैं । धन इनपर अपनी कृपा बनाये रखता है और ये लोग समय से आगे चलने का प्रयास करते हैं । ब्राह्मण वर्ण की राशि होने से इस राशि के जातक बहुत स्वाभिमानी होते हैं । इनके लक्ष्य भी बहुत ऊँचे होते हैं । 
कालपुरुष की गणनानुसार ये राशि 'लिंग और गुदा' स्थान में निवास करती है । जब बलवान होती है तो भरपूर यौनसुख देती है अन्यथा कम देती हैं । लेकिन इसके जातकों में यौनसुख की लालसा बढ़ी-चढ़ी रहती है ।

★ धनु-राशि

•• मुक्ति की खोज में सहायता करने वाली राशि, धनु-राशि है । इसके जातक आवश्यक रूप से प्रसन्न और संतोषी नहीं होते हैं । क्योंकि असल मुद्दा तो प्रसन्नता और संतोष है ही नहीं, असल मुद्दा तो मुक्ति है । अंतर्मन के निर्देशों का पालन, प्रकृति के अनुसरण की इच्छा और ज्ञान प्राप्त करने की उत्कण्ठ अभिलाषा के कारण, इनका जीवन धनुष की प्रत्यंचा के सामान तनावपूर्ण रहता है ।
अपने अधिकारों की रक्षा के लिये अंतिम समय तक जूझने वाले धनु-राशि के जातक दूसरों के अधिकारों के प्रति भी सचेत रहते हैं ।
ज्ञान के अलावा शक्ति संचालन से भरा उर्वरक मस्तिष्क रखने वाले धनु-राशि के जातक मान-सम्मान के लिये जीते हैं ।
ये लोग खाने के मामले में भी बड़े पारखी सिद्ध होते हैं । जब कभी भी आप किसी को धनु-राशि वालों के साथ खाने के टेबल पर देखें तो समझ जायें कि - वे लोग खाने में विभिन्नता चाहने वाले लोग हैं । मीठा खाना भी इन्हें खूब पसंद होता है । शराब से इन्हें दूर रहना चाहिये अन्यथा लिवर की खराबी से जूझना पड़ सकता है । पीने के पानी की मात्रा का ये लोग ध्यान रखें और भरपूर पसीना शरीर से निकले तो इनका स्वास्थ अच्छा माना जा सकता है । सोया-फूड और फल्लियों वाली सब्जियां इनके लिये स्वास्थ वर्धक सिद्ध होगी । 
धनु-राशि के जातक जब अपने अधिकारों के लिये जूझते हैं तो इनके जैसा कोई क्षत्रिय नहीं होता । लेकिन जब ये शांत होते हैं तो इनके जैसा कोई धर्मपरायण और इनके जैसा कोई ज्ञानी नहीं होता । ये दोनों स्वभाव इनकी विशेषता है और ये इस राशि के द्विस्वभाव होने से है ।
वृश्चिक-राशि के विपरीत ये लोग वचन से मुकरने वालों से बहुत द्वेष रखते हैं । ये लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों का भी ध्यान रखते हैं । क्योंकि ये लोग अनुशासन और नियम पालन को खूब समझते हैं ।
धनु-राशि के जातक ऐसे अर्जुन की तरह होते हैं जिसे अपने 'श्रीकृष्ण' की तलाश हैं । जो इनके जीवन में अभिव्यक्त इनकी चेतना के विकास में इनकी सहायता कर सके ।

★ मकर-राशि
● आध्यात्मिक संघर्ष की प्रतिक मकर-राशि के जातक युक्तिसंगत कार्यों में उलझे रहते हैं । हालांकि कई बार इनके तर्क इन्हें ही धोखा दे देते हैं । वास्तविकता भिन्न होने पर भी कई बार ये लोग स्वयं को स्थिर, विश्वसनीय और निष्कपट समझते हैं हालांकि इन आदर्शों से ये पर्याप्त दुरी पर होते हैं । भावनात्मक अस्थिरता और असाधारण लोगों की संगती इनके दुःख को बढ़ाने वाली होती है हालांकि ये ऐसा समझते नहीं हैं । इनके मित्र, जीवनसाथी और सहयोगी इन्हें विश्वसनीय नहीं समझते हैं । बहरहाल, इनकी अपार क्षमता और तीक्ष्ण बुद्धि इन्हें वातावरण को समझने में और स्वयं को वैसा ढालने में सहायता करती है ।
उच्चाभिलाषी और सौम्य मकर-राशि के जातक सेवाभावी होते हैं ।
★ कुंभ-राशि
•• आज आप किसी एक कला के भरोसे, केवल कड़ी मेहनत के भरोसे अथवा साधारण व्यापार के भरोसे नहीं चल सकते हैं । 
आज आपको अपनी कला को लोगों तक पहुचाना आना चाहिये, आज आपको कड़ी मेहनत कहाँ करनी चाहिये इसका सामान्य ज्ञान होना चाहिये और व्यापार के साथ आपको व्यापारिक नीतियाँ बनाना भी आना चाहिये । 
आपको लोगों पर अपनी छाप छोड़ना आना चाहिए । कुम्भ राशि के लोग ऐसे ही जीवट स्वभाव के होते हैं । 
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये लोग सहज ही सफलता के मार्ग पर आपको बढते दिखाई देंगे ।
क्यों कि इनमे पराक्रम, बुद्धी और ज्ञान का ऐसा तालमेल होता है कि ये सहज ही जीवन-चक्र और संन्यास को अलग-अलग रूपों में पहचान लेते हैं और अपना मार्ग चुन लेते हैं ।
बहरहाल, अपने नये-नये दृष्टिकोण और अपने जटिल जीवनपथ के लिये जाने, जाने वाले कुम्भ-राशि के जातक शिल्प-चातुर्य से परिपूर्ण और अन्वेषक-विचारधारा के होते हैं । 
वैसे, खाना भी इनके लिये महत्वपूर्ण होता है लेकिन इसके लिये ये लोग कोई नियम बनाना पसंद नहीं करते हैं । मीठा खाना इन्हें पसंद होता है - लेकिन मीठा ही इनके स्वास्थ के लिये उचित नहीं है । शराब की लत इनके नर्व-सिस्टम पर बुरा प्रभाव डालती है । 
बे-वजह के अपमान के ये घोर-विरोधी होते हैं और इसका प्रतिशोध लेते हैं । स्थिर स्वभाव के कारण इन्हें, इनके निर्धारित लक्ष्य से हटाना मुश्किल होता है । दिन के समय इनकी कार्यक्षमता उल्लेखनीय होती है लेकिन रात्रि के समय ये लोग शिथिल रहते हैं । ज्ञान-विज्ञान, अनुसंधान और आविष्कार इसके जातकों के लक्ष्य होते हैं । 
कुम्भ-राशि के जातक महत्वपूर्ण होते हैं और जन साधारण में अपनी महत्वपूर्ण छाप भी छोड़ते हैं ।
★ मीन-राशि
•• राशि-चक्र की अंतिम राशि मीन एक ऐसे अंत का संकेत करती है जहाँ इसके जातक अपनी चेतना को सर्वव्यापी बनाने के लिये बे-चैन और असंतुष्ट से बने रहते हैं । इसका अर्थ ये बिलकुल भी नहीं है कि - ये लोग सदा ही दुखी रहते है बल्कि सभी कुछ होते हुये भी मीन-राशि के जातक किसी अनिर्णीत की कमी को महसूस करते रहते हैं । 
ये लोग इतिहास, पुराण, धार्मिक ग्रन्थ और श्रेष्ठतम कलाकृतियों में विशेष रूचि रखते हैं । धार्मिक प्रतिपालन ये लोग परमात्मा के भय से करते हैं । वैसे मीन-राशि के जातक, धार्मिक, पुण्यात्मा, रूढ़िवादी और दैनिक जीवन के आनंद से रहित होते हैं ।
बहरहाल, विशेष कार्यभार और अपने उत्तरदायित्व को निभाने में सक्षम, मीन-राशि वाले सुन्दर आँखों वाले होते हैं ।