सरस्वती योग 
 
सरस्वती योग (प्रथम प्रकार )
 
परिभाषा :यदि बृहस्पति, शुक्र और बुध संयुक्त रूप से या अलग -अलग लग्न, 2,4,7,9 या 10वें भाव में स्थित हों, बृहस्पति स्वराशिगत,उच्च राशि या मित्र राशि में हो तो सरस्वती योग निर्मित होता हैं ।
(तीन सौ महत्वपूर्ण योग वी वी रामन)
फल:जातक कवि, ख्यातिप्राप्त,सभी विद्वानों में विद्वान, कुशल, धनी, सबसे 
प्रशंसित,उत्तम पत्नी और बच्चों वाला होता हैं ।
 
सरस्वती योग (द्वितीय प्रकार )
 
परिभाषा :यदि गुरु चंद्रमा के घर में और चंद्रमा गुरु के घर में हो एवं चंद्रमापर गुरु की दृष्टि भी हो तो सरस्वती योग निर्मित होता हैं ।
(ज्योतिष योग चंद्रिका )
फल:यह योग रखने वाला जातक अत्यन्त
प्रसिद्ध तथा सरस्वती का वरद पुत्र माना जाता है ।काव्य एवं संगीतादि क्षेत्र में वह उच्चकोटि की रूचि रखने वाला तथा अपनी कला से वह देश और विदेश में सर्वत्र प्रसिद्धि प्राप्त करता है ।