दिशाएं बढ़ाती हैं सफलता व संपन्नता
 
 
पूर्व, पश्चिम उत्तर और दक्षिण यह चार दिशाएं हैं। यह हम सभी जानते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि दिशाओं की भी उप दिशाएं होती हैं। जिनके आधार पर आपकी गृहस्थ जीवन, मनमुटाव, घर और आपकी तमाम समस्याओं को दूर कर सकते हैं।
घर में यहां हो खिड़कियां
उत्तर और पूर्व दिशा का मध्य ईशान कहलाता है। इस दिशा के स्वामी ब्रह्मा और शिवजी हैं। घर के दरवाजे और खिड़कियां इस दिशा में अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
यह दिशा वास्तुदोष से पीड़ित होने पर मन और बुद्धि पर विपरीत प्रभाव होता है। परेशानी और तंगी बनी रहती है। संतान के लिए भी यह दोष अच्छा नहीं होता। यह दिशा वास्तुदोष से मुक्त होने से मानसिक क्षमताओं पर अनुकूल प्रभाव होता है।
ताकि घर में हो धन की वृद्धि
वास्तुशास्त्र में पूर्व दिशा के समान उत्तर दिशा को रिक्त और भार रहित रखना शुभ माना जाता है। इस दिशा के स्वामी कुबेर हैं जो देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। यह दिशा वास्तु दोष से मुक्त होने पर घर में धन एवं वैभव में वृद्धि होती है। घर में सुख का निवास होता है।
पाएं आदर और सम्मान
वायव्य दिशा उत्तर पश्चिम के मध्य को कहा जाता है। वायु देव इस दिशा के स्वामी हैं। वास्तु की दृष्टि से यह दिशा दोष मुक्त होने पर व्यक्ति के सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आती है।
लोगों से सहयोग एवं प्रेम और आदर सम्मान प्राप्त होता है। इसके विपरीत वास्तु दोष होने पर मान सम्मान में कमी आती है.लोगो से अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते और अदालती मामलों में भी उलझना पड़ता है।
दंपत्ति में मधुर संबंध
पश्चिम दिशा का स्वामी वरूण देव हैं। भवन बनाते समय इस दिशा को रिक्त नहीं रखना चाहिए.इस दिशा में भारी निर्माण शुभ होता है। इस दिशा में वास्तुदोष होने पर गृहस्थ जीवन में सुख की कमी आती है।
पति पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध का अभाव रहता है। कारोबार में साझेदारों से मनमुटाव रहता है। यह दिशा वास्तुशास्त्र की दृष्टि से शुभ होने पर मान सम्मान, प्रतिष्ठा, सुख और समृद्धि कारक होता है।